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भारत की आज़ादी के लिए वैसे तो बहुत सारे लोगों ने बलिदानी दी है, लेकिन इन सबमें अगर मौजूदा दौर में किसी शख्सियत का सबसे अधिक प्रभाव देखेन को मिलता है तो वे हैं भगत सिंह। जिनकी विचारधारा आज भी युवाओं को प्रेरित करती हैं। ऐसे में आजादी के इस परवाने को हिंदी सिनेमा में भी खास जगह मिली और सिनेमा के अलग-अलग दौर में उनके शख्सियत को रूबरू कराती कई फिल्में आई हैं। आज शहीदे आजम के 111वें जन्मदिवस के मौके पर हम कुछ ऐसी ही फिल्मों की बात करें हैं जिन्होने देश को इस महान शख्सियत से रूबरू कराया।
'शहीदे-आज़म भगत सिंह'
आज़ादी के 7 साल बाद ही हिंदी सिनेमा ने शहीदे आज़मी को श्रद्धांजली देते हुए पहली फिल्म बनाई... 1954 में आई इस ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्म का नाम था 'शहीदे-आज़म भगत सिंह', जिसे जगदीश गौतम ने डायरेक्ट किया और प्रेम अदीब ने भगत सिंह का किरदार प्ले किया था।
शहीद भगत सिंह
इसके लगभग एक दशक बाद 1963 में शहीद भगत सिंह नाम के टाइटल वाली फिल्म में शम्मी कपूर पर्दे पर भगत सिंह बनकर आये। इस फिल्म को केएन बंसल ने डायरेक्ट किया था, वहीं फिल्म में शकीला, प्रेमनाथ और अचला सचदेव जैसे मुख्य किरदार थे।
शहीद
वहीं साल 1965 में मनोज कुमार ने शहीद बनायी, जिसमें उन्होंने सरदार भगत सिंह का रोल प्ले किया... भगत सिंह के किरदार में मनोज कुमार बेहद पसंद भी किए गए और इस फ़िल्म को कई अवॉर्ड्स मिले।
23 मार्च 1931- शहीद
वैसे इसके कई दशक तो हिंदी सिनेमा में भगत सिंह को आई फिल्म नहीं आई, लेकिन फिर 2002 में एक साथ तीन-तीन फ़िल्में आईं... जिसमें पहली फिल्म गुड्डू धनोआ के डायरेक्शन में बनी 23 मार्च 1931- शहीद थी। इस फिल्म में बॉबी देओल भगत सिंह बने तो सनी देओल चंद्रशेखर आज़ाद के किरदार में नजर आए।
द लेजेंड ऑफ़ भगत सिंह
वहीं इसी साल राजकुमार संतोषी ने भी शहीदे आज़म पर फिल्म द लेजेंड ऑफ़ भगत सिंह बनाई जिसमें अजय देवगन ने भगत सिंह के किरदार में नजर आए और इस किरदार में वे काफी जचें भी... ऐसे में इस फ़िल्म के लिए अजय को बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड भी मिला।
शहीदे-आज़म
भगत सिंह पर 2002 में आई तीसरी फ़िल्म थी शहीदे-आज़म, जिसमें सोनू सूद ने भगत सिंह का किरदार निभाया, जबकि इस फ़िल्म को सुकुमार नायर ने डायरेक्ट किया था।
रंग दे बसंती
वैसे तो ये फिल्म पूरी तरहे से भगत सिंह पर बेस्ड नहीं थी, पर फिल्म में चारों मुख्य किरदारों की तुलना देश के चार महान क्रांतिकारियों से की गई थी, जिसमें आमिर ख़ान ने चंद्रशेखर आज़ाद, सिद्धार्थ ने भगत सिंह, शरमन जोशी ने राजगुरु और कुणाल कपूर ने अशफ़ाक़उल्ला खां का किरदान निभाते दिखे थे। साल 2006 में आई राकेश ओमप्रकाश मेहरा की इस फ़िल्म रंग दे बसंती को काफी पसंद की गई थी।
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