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सिनेमा, समाज का आईना है और हर समय-काल, परिस्थितियों के साथा-साथ विचारधाराओं का भी इस पर व्यापक प्रभाव भी देखने को मिलता है। भारतीय सिनेमा में ऐसा ही प्रभाव महात्मा गांधी के विचारों का देखने को मिलता है, उनके विचारों से प्ररित कई सारी फिल्में आ चुकी हैं। लेकिन वहीं महात्मा गांधी को फिल्मों से कुछ खास लगाव नहीं था... ऐसे में गांधी जी ने अपने जीवन में सिर्फ एक फिल्म देखी थी वो भी अधूरी।
दरअसल, जिस वक्त भारत में बनी पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' का प्रीमियर हो रहा था, उस वक्त गांधी जी वतन से दूर दक्षिण अफ्रीका में राजनीतिक सामाजिक कार्यो में लगे हुए थे और भारत आने की तैयारी में थे। ऐसे में संयोग वश गांधी जी की वतन वापसी और भारतीय सिनेमा का उदय दोनो एक ही समय पर हुआ।
ऐसे में गांधी जी के विचारों से प्रेरित होकर निर्देशक विजय भट्ट ने 1943 में फिल्म 'राम राज्य' बनाई, जैसा कि गांधी जी उस वक्त भारत में राम राज्य का सपना देख रहे थे। फिल्म 'राम राज्य' की बात करें तो ये राम-रावण के युद्ध के बाद की कहानी थी,जिसमें कहानी मुख्य किरदार राम (प्रेम अदीब) और सीता (शोभना समर्थ) के द्वारा किए गए समाज हित के कार्यो को दर्शाया गया था।
ऐसे में इस फिल्म के मेकर्स ने ये फिल्म गांधी जी को दिखाने की सोची और साल 1944 में गाँधी जी के लिए इसका एक स्पेशल शो रखा गया। फिल्ममेकर्स को उम्मीद थी कि इस फिल्म को देखने के बाद गांधी जी का फिल्मों के प्रति नजरिया बदलेगा, हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ, बल्कि गांधी जी इस फिल्म को बीच में ही छोड़कर चले गए और इसके बाद उन्होंने जीवन में कभी कोई फिल्म नहीं देखी।
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