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बॉलीवुड में आमतौर पर गोरी रंगत को तरजीह दी जाती है और ऐसी कई सारी एक्ट्रेस हुई जिन्होने अपने इसी रूप-रंग की बदौलत इंडस्ट्री पर राज भी किया, पर इसी इंडस्ट्री में सांवली सलोनी काया वाली एक ऐसी एक्ट्रेस भी रही है जिसके मनमोहक रूप के आकर्षण ने लाखों लोगों को दिवाना बना डाला, जिसकी बोलती आंखो ने पर्दे पर अभिनय की नई परिभाषा गढ़ी। जी हां, हम बात कर रहे हैं दिग्गज अदाकार स्मिता पाटिल की जो आज भले ही इस दुनिया में ना हो पर अपनी बेमिशाल अदाकारी के जरिए वो हमेशा अपने चाहने वाले दिलों में जिंदा रहेंगी।
आज ही के दिन 17 अक्टूबर को दिवंगत एक्ट्रेस स्मिता पाटिल का जन्मदिन होता है, इस मौके पर आज हम आपको जीवन के कुछ रोचक पहलुओं से रूबरू करा रहे हैं।
ऐसा पड़ा स्मिता नाम
स्मिता पाटिल का जन्म 17 अक्टूबर 1956 को पुणे के एक मराठी परिवार में हुआ था, वैसे स्मिता के नामकरण के पीछे दिलचस्प वजह रही है... दरअसल, जन्म के बाद जैसे ही उनकी मां विद्या ताई पाटिल ने उनका चेहरा देखा उनके चेहरे पर खास स्मित यानी मुस्कान थी जिसे दख मां ने उनका नाम ही स्मिता रख दिया।
एक्ट्रेस बनने से पहले टीवी एंकर थी स्मिता
जी हां, फिल्मों में आने से पहले स्मिता पाटिल टीवी एंकर थी। दरअसल, स्मिता ने अपने करियर की शुरूआत मुम्बई दूरदर्शन में न्यूज रीडर के रूप में की थी। जिसके बाद उनका फिल्मों में आना हुआ।
पर्दे पर गंभीर किरदार में दिखने वाली स्मिता असल में बेहद शरारती थी
जी हां, पर्दे पर गंभीर और संजीदा किस्म के किरदार निभाने वाली स्मिता असल जिंदगी में पूरी टॉम ब्वॉय थी। जिसका बानगी ये थी कि जब न्यूज रीडर के तौर पर जब सभी फीमेल एंकर को साड़ी पहननी जरूरी थी, तब स्मिता दूरदर्शन तो जींस पहन कर ही जाया करती थीं लेकिन, जब उन्हें खबर पढ़ना होता था तो वो जींस के ऊपर से ही साड़ी लपेट लेतीं थी।
इस तरह से फिल्मों में आना हुआ
दरअसल, दूरदर्शन के लिए एकरिंग के दौरान ही स्मिता की मुलाकात जाने माने फिल्ममेकर श्याम बेनेगल से हुई और बेनेगल साहेब ने स्मिता की अंदर छुपी हुई प्रतिभा को पहचान कर अपनी फ़िल्म 'चरण दास चोर' में एक छोटी सी भूमिका निभाने को दिया। जिसके बाद स्मिता भूमिका, मंथन, मिर्च मसाला, मंडी और निशांत जैसी फिल्मों के जरिए आर्ट सिनेमा का चेहरा बनी।
हालांकि बाद में अस्सी के दशक में उन्होने कला से व्यावसायिक सिनेमा की ओर अपना रूख कर लिया। तभी उन्होंन सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के साथ 'नमक हलाल' और 'शक्ति' में काम किया और रूपहले पर्दे पर यादगार बन गई । 10 साल के छोटे से फिल्मी करियर में स्मिता ने कलात्मक और व्यवसायिक दोनो ही तरह की फिल्मों के जरिए खूब नाम कमाया और सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए पदमश्री से सम्मानित किया जा चुका है।
प्यार और शादी के लिए दुनिया से लड़ी और तोहमतें भी उठाईं
स्मिता पाटिल और राज बब्बर के प्यार के तराने आज भी बी-टाउन में चर्चित हैं, ये स्मिता के जादुई व्यक्तित्व का आकर्षण ही था कि शादीशुदा राज बब्बर उनके दिवाने हो गए और स्मिता भी उनके प्यार में पड़ गई। जिसके बाद दोनो ने पूरी दुनिया से बगावत कर एक दूसरे का हांथ थामा... यहां तक कि स्मिता पर राज बब्बर का घर तोड़ने के ताहमतें भी लगें। लेकिन मरते दम तक वो सिर्फ राज बब्बर को प्यार करती रहीं। स्मिता की मौत साल 1987 में बेटे प्रतीक के जन्म दे महज दो हफ्ते बाद ही हो गई।
Author: Yashodhara Virodai
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