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नवमी की रात को पूर्णाहूति का विधान है। इसे करने से मन की सभी इच्छाएँ पूरी हो जाती हैं। इसीलिए इसे मनोकामना वाला हवन कहते हैं। यानी कि नवरातों में नवमी के दिन किया गया यज्ञ और हवन सभी तरह की इच्छाएँ और मुरादें पूरी करने वाला होता है। आपको बता दें कि पुराणों के अनुसार हवन अथवा यज्ञ भारतीय परंपरा अथवा हिन्दू धर्म में शुद्धिकरण का एक कर्मकांड है। कुंड में अग्नि के माध्यम से देवता के निकट हवि पहुंचाने की प्रक्रिया को यज्ञ कहते हैं। हवि, हव्य अथवा हविष्य वे पदार्थ हैं, जिनकी अग्नि में आहुति दी जाती है। हवन कुंड का अर्थ है हवन की अग्नि का निवास स्थान। हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करने के पश्चात इस पवित्र अग्नि में फल, शहद, घी, काष्ठ इत्यादि पदार्थों की आहुति प्रमुख होती है।
नवरात्रि के पावन पर्व पर नवमी तिथि को हवन करने का विशेष महत्व है। अत: अगर आप घर पर ही सरल रीति से हवन करना चाहते है तो आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। हम आपके लिए लेकर आए हैं आसान तरीके वाली हवन करने की विधि। इस सरल हवन विधि द्वारा आप अपने पूरे परिवार के साथ यज्ञ-हवन करके नवरात्रि पूजन को पूर्णता प्रदान कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि आपके आसपास किसी बुरी आत्मा इत्यादि का प्रभाव है तो हवन प्रक्रिया इससे आपको मुक्ति दिलाती है। शुभकामना, स्वास्थ्य एवं समृद्धि इत्यादि के लिए भी हवन किया जाता है।
गौरतलब है कि हवन के धुएँ से प्राण में संजीवनी शक्ति का संचार होता है। हवन के माध्यम से बीमारियों से छुटकारा पाने का जिक्र ऋग्वेद में भी है। इसलिए हमें नवरातों के अलावा भी जब भी समय मिले हवन करते रहना चाहिए।
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